वेब सीरीज Panchayat में ‘माधव’ के किरदार से दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाने वाले अभिनेता बुल्लू कुमार के लिए अभिनय का सफर आसान नहीं रहा। बिहार के नवादा जिले के एक गांव से निकलकर थिएटर की दुनिया में कदम रखना, वर्षों तक संघर्ष करना, आर्थिक परेशानियों का सामना करना और फिर मुंबई आकर लगातार काम की तलाश करना—बुल्लू कुमार की कहानी मेहनत और धैर्य की कहानी है।
पटना में करीब एक दशक तक थिएटर करने के बाद बुल्लू कुमार ने फिल्मों और वेब सीरीज में अपनी जगह बनाने की कोशिश जारी रखी। Panchayat में ‘माधव’ का किरदार भले ही सीमित समय के लिए नजर आया, लेकिन उसकी सादगी और देसी अंदाज ने दर्शकों के बीच उन्हें खास पहचान दिलाई।
अब अभिनेता 2026 की फिल्म Ohh My Dog में Lalua के किरदार में नजर आ रहे हैं। फिल्म का निर्देशन अमित राय ने किया है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, पवन मल्होत्रा, राजेश कुमार, जितेंद्र जोशी समेत कई जाने-माने कलाकार नजर आ रहे हैं।
इसी सफर, संघर्ष, Panchayat की सफलता और Ohh My Dog के नए किरदार को लेकर बुल्लू कुमार ने Mozammil Mumtaz से खास बातचीत की।
सवाल: बुल्लू जी, सबसे पहले Panchayat और ‘माधव’ के किरदार की बात करते हैं। जब आपको पहली बार पता चला कि आप Panchayat का हिस्सा बनने जा रहे हैं, उस समय आपके मन में क्या चल रहा था?
बुल्लू कुमार: मेरे लिए वह बहुत खास पल था। मैं लंबे समय से काम कर रहा था और लगातार संघर्ष कर रहा था। Panchayat मेरे लिए सिर्फ एक और प्रोजेक्ट नहीं था। मुझे लगा कि शायद अब मेरे काम को वह पहचान मिलेगी, जिसका मैं लंबे समय से इंतजार कर रहा था।
ऑडिशन देने के बाद जब मेरा चयन हुआ और मुझे माधव का किरदार मिला, तो मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह छोटा-सा किरदार दर्शकों के बीच इतनी पहचान बना लेगा।
सवाल: माधव का किरदार बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। आपको क्या लगता है कि लोगों को माधव में ऐसा क्या पसंद आया?
बुल्लू कुमार: मुझे लगता है कि माधव बहुत जमीन से जुड़ा हुआ किरदार है। वह किसी बड़े शहर का या बहुत बनावटी किरदार नहीं है। उसकी अपनी सादगी है और अपना एक अलग अंदाज है।
Panchayat की खूबसूरती भी यही है कि उसमें गांव के छोटे-छोटे किरदारों को भी अपनी अलग पहचान मिलती है। शायद इसी वजह से दर्शक माधव से जुड़ पाए।
सवाल: क्या माधव के किरदार में आपको अपने गांव या अपने जीवन की कोई झलक दिखाई देती है?
बुल्लू कुमार: बिल्कुल। मैं खुद बिहार के नवादा जिले के एक गांव से आता हूं। मेरा बचपन गांव में ही बीता है। नदी, खेत, पहाड़ और गांव का माहौल मेरे जीवन का हिस्सा रहे हैं।
इसलिए गांव के माहौल और वहां के लोगों को समझना मेरे लिए बहुत मुश्किल नहीं था। उस अनुभव ने माधव के किरदार को समझने में मेरी काफी मदद की।
सवाल: Panchayat से पहले आपने थिएटर में करीब एक दशक तक काम किया। क्या थिएटर के अनुभव ने माधव के किरदार को निभाने में आपकी मदद की?
बुल्लू कुमार: थिएटर ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। मैंने पटना में लगभग दस साल थिएटर किया। थिएटर में कलाकार को अपने किरदार को सिर्फ बोलना नहीं होता, बल्कि उसे अंदर से समझना पड़ता है।
मेरे लिए थिएटर हमेशा से एक्टिंग की सबसे बड़ी ट्रेनिंग रही है। वहां से मुझे अभिनय की बुनियादी समझ मिली और अलग-अलग तरह के किरदारों को निभाने का आत्मविश्वास भी आया।
सवाल: आपके संघर्ष की बात करें तो एक वक्त ऐसा भी आया जब बच्चों की स्कूल फीस तक देने में परेशानी हुई। आज उस दौर को याद करते हैं तो क्या महसूस होता है?
बुल्लू कुमार: वह बहुत मुश्किल समय था। अपने बच्चों की फीस नहीं भर पाने की स्थिति मेरे लिए बेहद तकलीफदेह थी। लेकिन शायद जिंदगी में कुछ दौर ऐसे आते हैं, जो आपको तोड़ने के बजाय और मजबूत बनाते हैं।
मैंने हार नहीं मानी। लॉकडाउन के दौरान मैं गांव चला गया था और वहां खेती भी की। उस समय मैंने परिस्थितियों को स्वीकार किया और आगे बढ़ने की कोशिश करता रहा।
सवाल: आपके पिता चाहते थे कि आप सरकारी नौकरी करें, लेकिन आपने एक्टिंग को चुना। क्या कभी लगा कि शायद पिताजी सही कह रहे थे?
बुल्लू कुमार: उस समय उनकी बात पूरी तरह समझ नहीं आती थी। उन्हें लगता था कि पहले परिवार संभालना चाहिए और एक स्थिर नौकरी करनी चाहिए।
आज जब मैं खुद पिता हूं तो उनकी बात ज्यादा समझ आती है। लेकिन एक्टिंग मेरे लिए सिर्फ काम नहीं थी, यह मेरा जुनून था। इसलिए मैंने आखिरकार वही चुना, जिसमें मेरा दिल था।
सवाल: अब बात करते हैं आपकी नई फिल्म Ohh My Dog की। इसमें आप Lalua का किरदार निभा रहे हैं। इस रोल के बारे में क्या बता सकते हैं?
बुल्लू कुमार: Ohh My Dog मेरे लिए एक अलग तरह का अनुभव रहा है। फिल्म में मैं Lalua का किरदार निभा रहा हूं।
मेरे लिए यह इसलिए भी खास है क्योंकि मैं लगातार कोशिश करता हूं कि दर्शक मुझे सिर्फ माधव के रूप में न पहचानें, बल्कि अलग-अलग किरदारों में भी स्वीकार करें।
फिल्म की कास्ट में पंकज त्रिपाठी, पवन मल्होत्रा, राजेश कुमार, जितेंद्र जोशी और कई बेहतरीन कलाकार हैं। ऐसे कलाकारों के साथ काम करना अपने आप में एक सीखने का अनुभव है।
सवाल: Panchayat में आपको एक सादे और कॉमिक अंदाज में देखा गया। Ohh My Dog में Lalua का किरदार आपके लिए कितना अलग है?
बुल्लू कुमार: यही मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है। एक अभिनेता के तौर पर मैं खुद को दोहराना नहीं चाहता।
अगर दर्शक मुझे माधव के बाद किसी दूसरे किरदार में देखते हैं और उन्हें लगता है कि यह वही कलाकार नहीं है, तो मेरे लिए उससे बड़ी तारीफ कोई नहीं हो सकती।
एक अभिनेता के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि वह हर किरदार में कुछ नया लेकर आए।
सवाल: Ohh My Dog की कहानी और इसके भावनात्मक पक्ष ने आपको किस चीज से आकर्षित किया?
बुल्लू कुमार: फिल्म में इंसान और जानवर के बीच के रिश्ते और भावनात्मक जुड़ाव को कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
कहानी में एक तरफ अपू अपने प्यारे कुत्ते मोमो को तलाशती है, वहीं बिहार से जुड़ा एक अलग ट्रैक भी सामने आता है। मुझे लगा कि ऐसी कहानी का हिस्सा बनना मेरे लिए एक अलग अनुभव होगा।
सवाल: पंकज त्रिपाठी जैसे कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
बुल्लू कुमार: ऐसे कलाकारों के साथ काम करना अपने आप में सीखने का मौका होता है। मैं हमेशा मानता हूं कि सेट पर सिर्फ अपना सीन करने नहीं जाना चाहिए, बल्कि दूसरे कलाकारों को भी देखना चाहिए और उनसे सीखना चाहिए।
पंकज जी जैसे कलाकारों के साथ काम करना मेरे लिए निश्चित तौर पर यादगार अनुभव है। उनके काम करने के तरीके को देखना भी अपने आप में एक सीख है।
सवाल: क्या आपको लगता है कि Panchayat की सफलता ने आपके लिए Ohh My Dog जैसे प्रोजेक्ट्स के दरवाजे खोले?
बुल्लू कुमार: निश्चित रूप से Panchayat ने मेरी पहचान बहुत बड़ी कर दी। Panchayat से पहले मुझे और मेरे काम को उतनी पहचान नहीं मिली थी।
इस सीरीज ने मुझे वह पहचान दी, जिसके लिए मैं 2011 से संघर्ष कर रहा था। अब लोग मुझे जानते हैं और काम के मौके भी पहले से ज्यादा मिल रहे हैं।
मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात है कि आज लोग मुझे मेरे किरदारों के नाम से पहचानते हैं।
सवाल: क्या कभी डर लगता है कि लोग आपको हमेशा ‘माधव’ के नाम से ही याद करेंगे?
बुल्लू कुमार: डर से ज्यादा इसे मैं एक चुनौती मानता हूं। माधव मेरे करियर का बहुत महत्वपूर्ण किरदार है और मैं उसके लिए हमेशा आभारी रहूंगा।
लेकिन एक अभिनेता की असली सफलता तब है, जब लोग उसके अलग-अलग किरदारों को याद रखें। मेरी कोशिश है कि माधव के बाद भी लोग मुझे कई और किरदारों के नाम से पहचानें।
सवाल: अगर आपको Panchayat के माधव और Ohh My Dog के Lalua में से किसी एक को चुनना हो, तो किसे चुनेंगे?
बुल्लू कुमार: यह बहुत मुश्किल सवाल है। माधव ने मुझे पहचान दी और Lalua ने मुझे एक अलग तरह का किरदार करने का मौका दिया।
दोनों मेरे लिए खास हैं। मैं किसी एक को दूसरे से बड़ा नहीं कहूंगा।
सवाल: आज जब आप पीछे मुड़कर देखते हैं—गांव का थिएटर, पटना का संघर्ष, मुंबई आना और फिर Panchayat तक पहुंचना—तो सबसे बड़ा सबक क्या मिला?
बुल्लू कुमार: सबसे बड़ा सबक यही है कि संघर्ष से घबराना नहीं चाहिए।
मेरे जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव आए। मैंने थिएटर किया, मुंबई आया, काम मिला और फिर काम नहीं मिला। एक वक्त ऐसा भी आया जब आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई।
लेकिन मैंने एक्टिंग नहीं छोड़ी। अगर आप अपने काम से प्यार करते हैं तो मुश्किल समय में भी उसे छोड़ना नहीं चाहिए।
मेरा मानना है कि मेहनत का परिणाम तुरंत नहीं मिलता, लेकिन अगर आप लगातार अपने काम पर टिके रहें तो एक दिन रास्ता जरूर निकलता है।
सवाल: अंत में अपने दर्शकों के लिए क्या कहना चाहेंगे?
बुल्लू कुमार: मैं दर्शकों का दिल से शुक्रिया करना चाहता हूं। Panchayat के माधव को जिस तरह लोगों ने प्यार दिया, वह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।
अब Ohh My Dog में Lalua के रूप में भी दर्शकों का प्यार मिले, यही उम्मीद है। मेरी कोशिश आगे भी यही रहेगी कि हर बार कुछ नया करूं और अपने काम से लोगों का मनोरंजन करता रहूं।
सवाल: बहुत-बहुत धन्यवाद बुल्लू जी। उम्मीद है दर्शक आपको आगे भी कई नए और यादगार किरदारों में देखेंगे।
बुल्लू कुमार: बहुत-बहुत धन्यवाद। प्यार और आशीर्वाद बनाए रखिए।

