लेखक का परिचय
गिरधारी पटेल ‘काव्यांश’ हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी साहित्य के साधक, गीतकार, कवि और रचनाकार हैं। उनकी लेखनी में जीवन, रिश्ते, भक्ति, समाज, मानवीय संवेदनाएँ और जीवन-दर्शन अलग-अलग रूपों में दिखाई देते हैं। उनका लेखन किसी एक विषय या शैली तक सीमित नहीं है। कभी वे भक्ति के माध्यम से मनुष्य और ईश्वर के संबंध को देखते हैं, कभी रिश्तों की गहराइयों में उतरते हैं, कभी आधुनिक जीवन की उलझनों को शब्द देते हैं और कभी समाज की छोटी-बड़ी विसंगतियों पर मुस्कुराते हुए सवाल खड़े करते हैं। उनकी रचनात्मक-यात्रा की एक विशेषता यह है, कि वे सामान्य-जीवन की साधारण सी दिखाई देने वाली घटनाओं में भी कोई गहरी बात खोज लेते हैं। घर की बातचीत, गाँव का वातावरण, रिश्तों की गर्माहट, मन की उलझन, किसी बुजुर्ग की कही हुई बात, किसी किसान का अनुभव, किसी बच्चे का सवाल या समाज में चलती कोई सामान्य सी चर्चा, इन सबमें उन्हें साहित्य की सामग्री दिखाई देती है।
प्रमुख कृतियाँ
(1) दिव्य प्रकाश – यह पुस्तक उनकी आध्यात्मिक एवं गीतात्मक रचनात्मक-यात्रा की महत्वपूर्ण कृति है। इस रचना में भारतीय आध्यात्मिक चिंतन और जीवन के विभिन्न भावों को गीतों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। भक्ति, जीवन-दर्शन और आत्मचिंतन की भावना इस कृति के केंद्र में दिखाई देती है। यह पुस्तक लेखक की उस साहित्यिक दिशा को सामने लाती है, जहाँ शब्द केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं; बल्कि मन को भीतर की ओर ले जाने का साधन भी बनते हैं।
(2) कलियुग की गीता – यह पुस्तक आधुनिक जीवन की परिस्थितियों को गीता-प्रेरित जीवन-दृष्टि से देखने का एक रचनात्मक प्रयास है। इस कृति में परिवार, समाज, युवा, किसान, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विज्ञान, संघर्ष, रिश्ते और जीवन की अनेक आधुनिक परिस्थितियों को गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक पारंपरिक आध्यात्मिक-चिंतन और वर्तमान-जीवन के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश करती है। लेखक का उद्देश्य केवल पुराने विचारों को दोहराना नहीं, बल्कि यह देखना है कि आज के मनुष्य के प्रश्नों के सामने उन विचारों को किस तरह समझा जा सकता है।
(3) देव नामावली गीतमाला – यह पुस्तक भक्ति और गीत का सुंदर संगम है। इसमें देवी-देवताओं के नामों को केवल सूची की तरह प्रस्तुत करने के बजाय, उन्हें गीतात्मक-भाव में पिरोने का प्रयास किया गया है। भक्ति में नाम-स्मरण की परंपरा को गीतों की संवेदना के साथ जोड़ना इस कृति की विशेषता है। लेखक के लिए भक्ति केवल पूजा की विधि नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर श्रद्धा, विनम्रता, प्रेम और आत्मिक जुड़ाव का अनुभव भी है।
(4) मन के रिश्ते – यह पुस्तक मानवीय संबंधों की गहराइयों को समर्पित एक भावप्रधान कृति है। माँ, पिता, भाई-बहन, बेटियाँ, जीवनसाथी, मित्रता, प्रेम, विरह, दूरी, गलतफहमी, माफी, अहंकार, स्वार्थ, अकेलापन, बुजुर्ग, इंसानियत, प्रकृति, मिट्टी, ईश्वर, स्मृतियाँ और जीवन की अंतिम संध्या, इन सबके माध्यम से यह पुस्तक मनुष्य और रिश्तों के बीच के अदृश्य धागों को समझने का प्रयास करती है। इस कृति में दोहा-चौपाई जैसी भारतीय काव्य-परंपराओं का सहारा ले कर भावनाओं को सरल और आत्मीय-भाषा में व्यक्त किया गया है। इस पुस्तक का मूल विश्वास है क्योंकि रिश्ते केवल खून से नहीं बनते, उन्हें प्रेम, सम्मान, विश्वास और व्यवहार से जीवन मिलता है।
(5) कुछ तो लोग कहेंगे – यह पुस्तक लेखक की रचनात्मक-यात्रा में एक अलग पड़ाव है। यह पुस्तक समाज की उस आदत को केंद्र में रखती है, जिसमें मनुष्य अपने जीवन का निर्णय लेते समय बार-बार सोचता है कि लोग क्या कहेंगे? मुफ़्त की सलाह से ले कर, पड़ोस की नज़र तक।
रिश्तेदारों की राय से ले कर, सोशल-मीडिया की टिप्पणियों तक। सफलता से ले कर, असफलता तक । तुलना से ले कर, आलोचना तक। परिवार की चिंता से ले कर, अपने सपनों तक । यह पुस्तक इन सबको हास्य, व्यंग्य, अनुभव और जीवन-दर्शन के साथ देखने का प्रयास करती है ।इसका उद्देश्य लोगों का विरोध करना नहीं, बल्कि यह समझना है कि लोगों की बात सुनना और लोगों की बात पर अपनी जिंदगी चलाना; दो अलग बातें हैं। इस पुस्तक की केंद्रीय भावना है – सब की सुनें, लेकिन विवेक से चुनें | शायद ये ही, इस पूरी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है।
लेखक का साहित्य के प्रति दृष्टिकोण
गिरधारी पटेल ‘काव्यांश’ की लेखनी में एक बात लगातार दिखाई देती है – साधारण जीवन के भीतर छिपे, असाधारण भावों को पहचानना। वे मानते हैं, कि साहित्य केवल बड़े विषयों का नाम नहीं। एक माँ की चुप्पी भी साहित्य है। पिता का मौन भी साहित्य है। किसान की मिट्टी भी साहित्य है | बेटी की विदाई भी साहित्य है। बुजुर्ग की प्रतीक्षा भी साहित्य है। किसी बच्चे का सवाल भी साहित्य है। और कभी-कभी पड़ोसी की कही हुई एक छोटी-सी बात भी किसी पूरी किताब की शुरुआत बन सकती है। उनकी रचनाओं में भारतीय जीवन-मूल्यों, पारिवारिक संवेदनाओं, आध्यात्मिक-चिंतन, सामाजिक-अनुभव और लोक-जीवन की सहजता का मेल दिखाई देता है। हिन्दी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी भाषा और लोक-संस्कृति से उनका जुड़ाव उनकी रचनात्मक-पहचान को और व्यापक बनाता है। लेखक के लिए साहित्य, केवल शब्दों का संग्रह नहीं है। साहित्य वह है, जो पढ़ने के बाद मन में कुछ छोड़ जाए। कोई प्रश्न, कोई स्मृति, कोई मुस्कान, कोई आँसू, कोई विचार, या फिर जीवन को देखने का कोई नया तरीका। उनका प्रयास है, कि उनकी रचनाएँ पाठक को उपदेश देने के बजाय; उसके साथ बातचीत करें। कहीं गीत बन कर, कहीं कविता बन कर, कहीं दोहा बन कर, कहीं कहानी बन कर और कभी हल्के-से व्यंग्य में मुस्कुराकर। एक लेखक, अनेक विषय, उनकी अब तक की रचनात्मक-यात्रा को देखें तो विषय अलग-अलग दिखाई देते हैं | भक्ति से जीवन-दर्शन तक। ईश्वर से मनुष्य तक, रिश्तों से समाज तक, गाँव की मिट्टी से आधुनिक तकनीक तक, व्यक्तिगत अनुभव से सार्वभौमिक-भाव तक।
लेकिन इन सभी के भीतर एक साझा-धारा दिखाई देती है | मनुष्य को समझने की कोशिश है, जैसे –
मनुष्य क्या सोचता है?
किससे प्रेम करता है?
किससे डरता है?
क्यों दुःखी होता है?
क्यों दूसरों की बातों से प्रभावित होता है?
क्यों रिश्ते बनाता और खोता है?
और अंततः अपने जीवन को अर्थ देने की कोशिश क्यों करता है?
शायद ये ही प्रश्न उनकी लेखनी को लगातार आगे बढ़ाते हैं।
लेखक का विश्वास
गिरधारी पटेल ‘काव्यांश’ का विश्वास है, कि शब्द तभी सार्थक होते हैं; जब वे मनुष्य के मन तक पहुँचें। एक अच्छा गीत किसी के अकेलेपन में साथी बन सकता है। एक कविता, किसी की आँखों में छिपे आँसू को शब्द दे सकती है। एक कहानी, किसी को अपने जीवन की गलती समझा सकती है और एक विचार किसी व्यक्ति को, वर्षों से रुके हुए कदम को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दे सकता है | इसी विश्वास के साथ उनकी साहित्यिक-यात्रा आगे बढ़ रही है। जीवन के साथ लेखन की यह यात्रा, अभी पूरी नहीं हुई है। क्योंकि लेखक के लिए, हर नई सुबह एक नया विषय लेकर आती है। हर अनुभव एक संभावित रचना है, हर प्रश्न एक नए विचार की शुरुआत है और हर पाठक एक नई कहानी का संभावित साथी। शायद इसलिए लेखन की यह यात्रा, किसी अंतिम-पन्ने पर समाप्त नहीं होती। किताबें पूरी होती हैं, लेकिन शब्दों की यात्रा चलती रहती है।
निष्कर्ष प्रकाशन
मैं निष्कर्ष प्रकाशन एवं निष्कर्ष प्रकाशन की संस्थापिका व संचालिका डॉ. दिव्या सिन्हा जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ | उनके सहयोग व मार्गदर्शन से मेरी पाँचों पुस्तकें प्रकाशित हुईं तथा मेरे लिए अत्यंत हर्ष का विषय है कि मेरी प्रथम पुस्तक ‘दिव्य-प्रकाश’ को निष्कर्ष प्रकाशन द्वारा Best Book Of The Year-2026 से सम्मानित किया गया है |

