नई दिल्ली: भारत में टाइप 1 डायबिटीज़ (Type 1 Diabetes) से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक राहत भरी खबर है। देश में टाइप 1 डायबिटीज़ देखभाल प्रणाली को और अधिक सशक्त और सुलभ बनाने के उद्देश्य से सोमवार, 20 जुलाई को नई दिल्ली के कंस्टीटूशन क्लब ऑफ इंडिया में ‘इंटरनेशनल टाइप 1 डायबिटीज़ समिट 2026’ का आधिकारिक शुभारंभ किया गया।
इस पहल का नेतृत्व ‘द फ्रेंड्स ऑफ मेवाड़’ (The Friends of Mewar) द्वारा ‘ब्रेकथ्रू T1D’ और ‘विलियम जे. क्लिंटन फाउंडेशन’ के विशेष सहयोग से किया जा रहा है।
जोधपुर में जुटेगा वैश्विक मंच
नई दिल्ली में हुए इस कर्टेन रेज़र (Curtain Raiser) कार्यक्रम के दौरान घोषणा की गई कि मुख्य सम्मेलन 30 जुलाई से 1 अगस्त 2026 तक जोधपुर में आयोजित किया जाएगा। इस तीन दिवसीय महासम्मेलन में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और भारत के विभिन्न हिस्सों से शीर्ष एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, शोधकर्ता और रोगी अधिकार कार्यकर्ता हिस्सा लेंगे।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में भारत की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में बच्चों में होने वाली टाइप 1 डायबिटीज़ को औपचारिक मान्यता मिली है। इससे शीघ्र पहचान और किफायती उपचार की दिशा में तेजी आने की उम्मीद है।
जागरूकता नहीं, अब ठोस कार्रवाई का समय: पद्मजा कुमारी परमार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ‘द फ्रेंड्स ऑफ मेवाड़’ की संस्थापक और ‘ब्रेकथ्रू T1D’ की ग्लोबल एम्बेसडर पद्मजा कुमारी परमार ने कहा कि यह सम्मेलन केवल जागरूकता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं में दीर्घकालिक बदलाव लाने का एक सामूहिक प्रयास है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा, “आज हम केवल एक और स्वास्थ्य सम्मेलन की घोषणा नहीं कर रहे हैं, बल्कि टाइप 1 डायबिटीज़ से जूझ रहे प्रत्येक बच्चे और परिवार के लिए एक मजबूत भविष्य के निर्माण का आह्वान कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि जागरूकता को ठोस कार्रवाई और प्रभावी नीतिगत परिणामों में बदला जाए।”
ज्ञात हो कि उदयपुर की राजकुमारी पद्मजा कुमारी परमार स्वयं पाँच वर्ष की आयु से टाइप 1 डायबिटीज़ के साथ जीवन जी रही हैं। उन्होंने अपने चार दशकों के व्यक्तिगत अनुभव को रोगी सशक्तिकरण और समान स्वास्थ्य सेवाओं की वकालत में समर्पित कर दिया है।
सम्मेलन के प्रमुख मुद्दे और लक्ष्य
जोधपुर में होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:
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शीघ्र निदान (Early Diagnosis) और निवारक स्वास्थ्य मॉडल।
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सभी के लिए जीवन रक्षक इंसुलिन की समान और सस्ती उपलब्धता।
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डायबिटीज़ तकनीक और कंटीन्यूअस ग्लूकोज़ मॉनिटरिंग (CGM) का विस्तार।
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मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली।
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डिजिटल नवाचार और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में सुधार।
आगे की राह
सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों के विचार-विमर्श से क्रियान्वयन योग्य सिफारिशें (Actionable Recommendations) तैयार की जाएंगी। ये सिफारिशें भारत सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों को टाइप 1 डायबिटीज़ देखभाल प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करेंगी।
आयोजकों ने ब्रेकथ्रू T1D और विलियम जे. क्लिंटन फाउंडेशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन संस्थाओं ने वैश्विक स्तर पर डायबिटीज़ अनुसंधान को नई ऊर्जा दी है। इसके साथ ही, यह भी घोषणा की गई कि जोधपुर सम्मेलन के समापन सत्र के दौरान इंटरनेशनल टाइप 1 डायबिटीज़ समिट 2027 की मेज़बान नगरी और तिथियों का भी ऐलान किया जाएगा।

