Wednesday, February 11, 2026
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अपने बयानों को लेकर अक्सर विवादों में रहनेवाले पूर्व IPS अमिताभ दास पुनः एक वार विवादों के घेरे में आ गये हैं।

केंद्र एवं राज्य सरकार पर लगातार विवादास्पद एवं अमर्यादित टिप्पणी कर सुर्खियों में बने रहना इनकी आदत सी बन गयी है। सरकार से इनकी नाराजगी जगजाहिर है। और हो भी क्यों नहीं , इसी सरकार ने 2018 में इन्हें अयोग्य करार देते हुए इन्हें जबरन रिटायर्ड जो कर दिया था। कहा जाता है कि ये कभी भी अपना ACR वरीय पदाधिकारी से नहीं लिखावाये, क्योंकि इनके नजर में सभी वरीय पदाधिकारी चोर हैं। अब इसे मानसिक दिवालियापन ना कहा जाए तो और क्या ?

*खुद 11 साल तक यौन शोषण के आरोपी रहे हैं अमिताभ दासः,बाद में हुए दोषमुक्त*

हाल के दिनों में कुछ मीडिया प्लेटफार्म पर पूर्व IPS अमिताभ दास के द्वारा नीट मामले में सरकार पर बलात्कारियों का संरक्षण देने का आरोप लगाया गया है। जबकि अमिताभ दास खुद यौन शोषण के आरोपी रहे हैं ग्यारह वर्षों तक लंबी लड़ाई के बाद उन्हें दोषमुक्त किया गया।
*क्या था शबनम केस*

साल 2006 में एक महिला ने (जो कि एक रिटायर्ड IPS अधिकारी की बेटी बताई गई) अमिताभ कुमार दास पर इनके यौन शोषण करने और शादी का झूठा वादा करने का आरोप लगाया।

घटना वर्ष 2006 की है जमुई जिले में BMP-11 के तत्कालीन कमांडेट रहने वक्त अमिताभ कुमार दास पर एक महिला ने आरोप लगाया था कि उन्होंने उनका 8-9 साल तक यौन शोषण किया और शादी का झूठा वादा भी किया । महिला का दावा था कि उन्होंने कई वर्षों तक उनसे संपर्क रखा और शादी का वादा किया, लेकिन बाद में उन्होंने शादी से इनकार कर दिया।
सरकार ने मामले की जांच करवाई जांच की जिम्मेदारी दी गई प्रीता वर्मा को । प्रीता वर्मा के जांच में कुछ नही निकला तब इसकी जांच IPS केशव को सौंपी गई । CAT पटना, हाइकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक 11 वर्षों की लंबी लड़ाई के बाद अमिताभ दास को राहत मिली और आरोप साबित नही हो पाया । अमिताभ दास इसे सरकार की साजिश बताते हैं और सरकार उनपर लगे आरोपों को सत्य मानते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई ।

हाल के दिनों में अमिताभ कुमार दास ने जिस तरह प्रधानमंत्री का नाम लेते हुए राष्ट्रपति को पत्र लिखा है ,वह उनके मानसिक दिवालियापन को दर्शाता है ।

अतः कुछ मीडिया कर्मियों को चाहिए कि पहले शबनम सिन्हा को ढूंढकर इनका बयान ले फिर पता चलेगा कि अमिताभ दास हैं कौन ?
*कुपथ-कुपथ रथ दौड़ाता जो , पथ प्रदर्शक वह है*
*लाज लजाती जिसके कृति से, धृति उपदेशक वह है*

चर्चा यह भी है कि 2006 में शबनम प्रकरण , SP देवघर के रूप में अपने पदस्थापन के दौरान एक विदेशी महिला के साथ छेड़-छाड़ के आरोपी रह चुके अमिताभ कुमार दास दूसरों के DNA TEST की मांग कर रहे हैं ।

सरकार से अपनी नाराजगी में ये इतना स्तरहीन बयान देनेवाले अमिताभ कुमार दास इतना नीचे गिर जाएंगे ऐसा किसी ने सोचा नहीं था। ये अपने बयानों से जनता को सरकार के प्रति उकसाना चाहते हैं, झूठे, विवादास्पद एवं अमर्यादित बयान देकर जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करना चाहते हैं।

यही कारण है कि ये रिटायर्ड होने के बावजूद IPS लेटर पैड और Govt Emblem use कर रहे हैं। सेवानिवृति के बाद भी इनके द्वारा अपने निजी लेटर पैड पर भारत सरकार के चिह्न का उपयोग किया जा रहा है जो मुख्य रूप से ‘भारत का राज्य प्रतीक (अनुचित उपयोग निषेध) अधिनियम, 2005’ और ‘द स्टेट एम्बलेम ऑफ इंडिया (रेगुलेशन ऑफ यूज) रूल्स, 2007’ के तहत दंडनीय अपराध है। साथ ही एक जनतांत्रिक एवं चुने हुए सरकार पर ऐसे अपुष्ट खबर फैलाकर राष्ट्र की सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए इन्हें NSA Act लगना चाहिए।

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