Tuesday, January 13, 2026
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बजट 2026 से पहले खुदरा कारोबार की चेतावनी: कर्ज नाइंसाफी, बाजार असंतुलन पर सरकार से हस्तक्षेप की मांग

बजट 2026 से पहले भारत के खुदरा और थोक व्यापार क्षेत्र ने सरकार के सामने अपनी सबसे गंभीर चिंता रख दी है। देश की घरेलू खपत की रीढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र ने चेतावनी दी है कि यदि नीतिगत स्तर पर तुरंत सुधार नहीं हुआ, तो जमीनी व्यापार व्यवस्था को अपूरणीय नुकसान हो सकता है। अहमदाबाद चैंबर्स ऑफ कॉमर्स वेलफेयर फाउंडेशन (CCWF) के चेयरमैन जयेंद्र टन्ना के नेतृत्व में संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया है कि यह क्षेत्र किसी राहत पैकेज की नहीं, बल्कि निष्पक्ष नीति, बराबरी के अवसर और वित्तीय न्याय की मांग कर रहा है। करोड़ों किराना दुकानदारों, थोक व्यापारियों और पारिवारिक उद्यमों की आवाज बनकर इस संगठन ने बजट से पहले सरकार को आईना दिखाया है।

ज्ञापन का सबसे बड़ा मुद्दा एमएसएमई ढांचे के भीतर बढ़ती कर्ज असमानता है, जिस पर Ahmedabad CCWF के चेयरमैन जयेंद्र टन्ना ने विशेष चिंता जताई है। हाल के वर्षों में एमएसएमई की सीमा बढ़ाने का उद्देश्य कारोबार को बढ़ावा देना था, लेकिन इसका असर उल्टा पड़ा है। छोटे दुकानदार और विशाल टर्नओवर वाली कंपनियां अब एक ही श्रेणी में रखी जा रही हैं। बैंक कम जोखिम वाले बड़े उद्यमों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि सीमित पूंजी, स्थिर नकदी प्रवाह और अधिक रोजगार देने वाले छोटे व्यापारी संस्थागत कर्ज से बाहर हो रहे हैं। संगठन ने 100 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले कारोबार के लिए अलग से कर्ज कोटा तय करने और बैंकिंग मानकों में स्पष्ट विभाजन की मांग की है, ताकि पहली पीढ़ी के व्यापारियों और कमजोर इकाइयों को जीवनरेखा मिल सके।

बाजार में बढ़ती असमान प्रतिस्पर्धा को लेकर भी Ahmedabad CCWF के चेयरमैन जयेंद्र टन्ना ने सरकार को सख्त संदेश दिया है। छोटे भौतिक दुकानदार पूंजी आधारित भारी छूट और घाटे पर बिक्री करने वाली रणनीतियों से जूझ रहे हैं। नियमों के असमान पालन और नियामक खामियों ने बाजार को एकतरफा बना दिया है, जहां स्थानीय कारोबार दम तोड़ रहा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि सभी खुदरा स्वरूपों के लिए एक समान ढांचा लागू हो, ताकि शिकारी मूल्य निर्धारण पर लगाम लगे और ईंट-पत्थर की दुकानों तथा डिजिटल मंचों के बीच वास्तविक बराबरी सुनिश्चित हो सके। चेतावनी दी गई है कि यदि यह सिलसिला यूं ही चलता रहा, तो भारत का पारंपरिक व्यापार तंत्र कमजोर पड़ जाएगा।

बजट 2026

जीएसटी को लेकर व्यापारियों की बेचैनी भी Ahmedabad CCWF के चेयरमैन जयेंद्र टन्ना के ज्ञापन में खुलकर सामने आई है। कर प्रणाली के औपचारिक होने से दायरा जरूर बढ़ा है, लेकिन छोटे व्यापारियों के लिए अनुपालन बोझ कई गुना बढ़ गया है। बार-बार नोटिस, राज्यों में अलग-अलग व्याख्या और जटिल रिटर्न फाइलिंग ने रोजमर्रा के कारोबार को जोखिम भरा बना दिया है। संगठन ने टर्नओवर आधारित सरल जीएसटी व्यवस्था, पूरे देश में एक समान व्याख्या और छोटे करदाताओं के लिए भरोसे पर आधारित, गैर-टकराव वाला दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है। उनका कहना है कि डर नहीं, बल्कि सुविधा से ही कर संग्रह मजबूत होगा।

तेजी से हो रही डिजिटल प्रक्रिया को भी Ahmedabad CCWF के चेयरमैन जयेंद्र टन्ना ने व्यापारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बताया है। ऑनलाइन फाइलिंग, अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर और बैंकिंग प्लेटफॉर्म छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त खर्च और दबाव डाल रहे हैं। बिना प्रशिक्षण के सिस्टम थोपे जा रहे हैं, जिससे गलतियों और दंड का खतरा बढ़ रहा है। ज्ञापन में मुफ्त या रियायती डिजिटल अनुपालन टूल्स, संगठित प्रशिक्षण कार्यक्रम और बहुभाषी सहायता केंद्रों के लिए बजटीय प्रावधान की सिफारिश की गई है। व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल बदलाव सहयोगी होना चाहिए, दंडात्मक नहीं।

वर्किंग कैपिटल की कमी को लेकर भी Ahmedabad CCWF के चेयरमैन जयेंद्र टन्ना ने सरकार का ध्यान खींचा है। पतले मार्जिन और तेज लेनदेन पर चलने वाले खुदरा कारोबार के लिए नकदी जीवनरेखा है, लेकिन बैंकिंग व्यवस्था इसे नजरअंदाज कर रही है। संगठन ने जीएसटी डेटा से जुड़े कार्यशील पूंजी ऋण, खुदरा व्यापार के लिए विशेष क्रेडिट लाइन और कम जमानत पर ऋण की मांग की है। ज्ञापन के अंत में खुदरा और थोक व्यापार को औपचारिक रूप से एक प्रमुख आर्थिक क्षेत्र का दर्जा देने और नीति-निर्माण निकायों में अनिवार्य प्रतिनिधित्व की मांग रखी गई है। संदेश साफ है कि मजबूत खुदरा तंत्र के बिना रोजगार, खपत और आर्थिक स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।

अधिक जानकारी के लिए –
Email: admn.accwf@gmail.com
WhatsApp. 9824145318

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